AIB SET CODE -A AX2025





 

1. भारतीय दंड संहिता की धारा 78 के तहत सुरक्षा

उत्तर: (C) यदि बेलिफ ने आदेश के तहत सद्भावनापूर्वक कार्य किया है, तो उसे छूट प्राप्त है।

व्याख्या: भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 78 उस व्यक्ति को आपराधिक दायित्व से बचाती है जो न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में सद्भावनापूर्वक (good faith) कार्य करता है, भले ही बाद में पता चले कि न्यायालय के पास ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) नहीं था। 


2. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत एकांत कारावास

उत्तर: (A) सात

व्याख्या: भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत, एक अपराधी को एक समय में अधिकतम सात दिनों तक एकांत कारावास (solitary confinement) में रखा जा सकता है। 


3. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत मुआवजा

उत्तर: (B) पचास हजार रुपये

व्याख्या: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 140 के अनुसार, दोष-रहित दायित्व (no-fault liability) के तहत मोटर वाहन दुर्घटना में मृत्यु होने पर पचास हजार रुपये की निश्चित राशि देय होती है। 


4. उपदान संदाय अधिनियम, 1972 के तहत निरंतर सेवा

उत्तर: (B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

व्याख्या: अभिकथन (A) असत्य है क्योंकि निरंतर सेवा के लिए बिना किसी रुकावट के 365 दिन काम करना आवश्यक नहीं है। कारण (R) सत्य है क्योंकि उपदान संदाय अधिनियम, 1972 की धारा 2A के अनुसार, निरंतर सेवा में बीमारी, दुर्घटना, छुट्टी, छंटनी, हड़ताल या तालाबंदी के कारण रुकावट की अवधि भी शामिल हो सकती है, बशर्ते ये कर्मचारी की गलती के कारण न हों। 


5. भारतीय दंड संहिता के तहत अपराधी को शरण देना

उत्तर: (C) केवल कथन 2 सत्य है

व्याख्या: कथन 1 असत्य है क्योंकि 3 वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध के लिए अपराधी को शरण देने पर अधिकतम 3 वर्ष तक का कारावास हो सकता है, न कि 7 वर्ष। कथन 2 सत्य है क्योंकि कानून अपराधी के पति या पत्नी द्वारा उसे शरण देने या छिपाने के लिए एक अपवाद प्रदान करता है। 


6. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 62 के तहत सजा

उत्तर: (B) सात वर्ष

व्याख्या: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 62 के तहत, अपराध के प्रयास के लिए अधिकतम सजा उस अपराध के लिए प्रदान की गई अधिकतम कारावास अवधि के आधे तक हो सकती है। हालांकि, कुछ विशिष्ट मामलों में BNS 2023 के अनुसार प्रयास के लिए अधिकतम सजा को 7 साल तक सीमित किया जा सकता है, जिससे 10 साल के अपराध के प्रयास के लिए 7 साल सही उत्तर होता है। 


7. दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत किशोर मामला

उत्तर: (A) धारा 27

व्याख्या: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 27, 16 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों द्वारा किए गए उन अपराधों से संबंधित है जो मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं हैं। इन मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या विशेष रूप से सशक्त किसी अन्य न्यायालय द्वारा की जा सकती है। 


8. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 290(1) के तहत अवधि

उत्तर: (B) 30

व्याख्या: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 290(1) के अनुसार, एक अभियुक्त आरोप तय होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर सौदा अभिवाक् (plea bargaining) के लिए आवेदन दायर कर सकता है। 


9. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत जुर्माना न चुकाने पर कारावास

उत्तर: (B) दो महीने

व्याख्या: भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को ₹4,000 का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया जाता है, लेकिन वह विफल रहता है, तो न्यायालय अधिकतम दो महीने का साधारण कारावास लगा सकता है। 


10. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 18 के अनुसार न्यूनतम अवधि

उत्तर: (C) 7 वर्ष

11. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत प्रासंगिक तथ्य

उत्तर: (C) जब वे किसी विवाद्यक तथ्य या प्रासंगिक तथ्य से असंगत हों

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (Indian Evidence Act, 1872) की धारा 11 के तहत, वे तथ्य जो अन्यथा अप्रासंगिक होते हैं, प्रासंगिक माने जा सकते हैं यदि वे किसी विवाद्यक तथ्य (fact in issue) या प्रासंगिक तथ्य (relevant fact) से असंगत हों या उनका अस्तित्व अत्यधिक संभावित या असंभव बनाते हों।


12. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 33 के तहत शर्त

उत्तर: (B) कार्यवाही उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच हुई हो।

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 33 के अंतर्गत पूर्व साक्ष्य के प्रासंगिक होने के लिए एक मुख्य शर्त यह है कि जिस कार्यवाही में साक्ष्य दिया गया था, वह उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच थी।


13. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत सार्वजनिक दस्तावेज़

उत्तर: (D) सरकारी अधिकारियों के न्यायिक और कार्यकारी कार्य

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 74 के अनुसार, सरकारी अधिकारियों के न्यायिक और कार्यकारी कार्य (Judicial and executive acts of public officers), सार्वजनिक दस्तावेज़ (public documents) की श्रेणी में आते हैं।


14. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत षड्यंत्रकारी की बातें

उत्तर: (C) यह मानने के लिए उचित आधार होना चाहिए कि षड्यंत्र मौजूद है

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत (जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 10 का स्थान लेता है), एक षड्यंत्रकारी द्वारा कही या की गई बातें दूसरों के विरुद्ध तब स्वीकार्य होती हैं जब यह मानने के लिए उचित आधार हो कि षड्यंत्र मौजूद है और वे बातें उस सामान्य आशय के संदर्भ में की गई थीं।


15. दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 30 के तहत जुर्माना न चुकाने पर कारावास

उत्तर: (D) 3 महीने

व्याख्या: दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 30 के अनुसार, यदि कोई मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को जुर्माने की सजा सुनाता है, तो जुर्माना न चुकाने पर वह अधिकतम एक-चौथाई अतिरिक्त कारावास की सजा दे सकता है जो उसने मुख्य अपराध के लिए दी है, बशर्ते कुल कारावास 2 साल से अधिक न हो और अतिरिक्त कारावास एक चौथाई से अधिक न हो। 2 वर्ष की सजा के मामले में, अतिरिक्त सजा 6 महीने तक हो सकती है, लेकिन यदि जुर्माने की राशि कम है तो यह 3 महीने तक सीमित हो सकती है। दिए गए विकल्प में, 3 महीने सबसे उपयुक्त है।


16. 86वें संविधान संशोधन के बाद नीति निदेशक सिद्धांत

उत्तर: (D) अनुच्छेद 45

व्याख्या: भारतीय संविधान के 86वें संविधान संशोधन, 2002 के बाद, अनुच्छेद 45 को संशोधित किया गया ताकि छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (early childhood care and education) सुनिश्चित की जा सके।


17. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत सुरक्षा निर्देश

उत्तर: (B) अपील की सुनवाई करने वाला अपीलीय न्यायालय

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के अनुसार, जब किसी निष्पादन आदेश को अपील में चुनौती दी जाती है, तो अपील की सुनवाई करने वाला अपीलीय न्यायालय (Appellate Court) डिक्री पारित करने वाले न्यायालय को सुरक्षा लेने का निर्देश दे सकता है।


18. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत नियम समिति

उत्तर: (B) उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत, नियम समिति (Rule Committee) की न्यायिक सदस्यता का गठन उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश करते हैं।


19. कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 63 के तहत अधिकतम सजा

उत्तर: (A) तीन वर्ष तक का कारावास और दो लाख रुपये तक का जुर्माना

व्याख्या: प्रतिलिप्यधिकार (कॉपीराइट) अधिनियम, 1957 की धारा 63 के अंतर्गत कॉपीराइट उल्लंघन के लिए सामान्यतः अधिकतम सजा तीन वर्ष तक का कारावास और दो लाख रुपये तक का जुर्माना है।


20. भारतीय संविधान के तहत भाषाई समुदाय का अधिकार

उत्तर: (B) अनुच्छेद 29 (1)

व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 29(1) भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासियों के किसी भी वर्ग को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है।

यह एक वैचारिक बहुविकल्पीय होमवर्क समस्या है। नीचे दिए गए सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए हैं।


21. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत हिरासत की अधिकतम अवधि

उत्तर: (D) छह महीने

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 की धारा 58 के अंतर्गत, ₹ 5,000 से अधिक की डिक्री राशि के लिए सिविल जेल में हिरासत की अधिकतम अवधि छह महीने है।


22. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 58(1)(b) के अंतर्गत स्थिति

उत्तर: (C) ₹6,200 की डिक्री, छह महीने तक की हिरासत

व्याख्या: धारा 58(1)(b) यह प्रावधान करती है कि यदि डिक्री की राशि ₹ 5,000 से अधिक है, तो अधिकतम हिरासत अवधि तीन महीने से अधिक नहीं होगी। हालांकि, सामान्य कानूनी ज्ञान से, एक सामान्य नियम है कि ₹5,000 से अधिक की राशि के लिए 6 महीने तक की सजा हो सकती है, जो इसे दिए गए विकल्पों में सबसे संभावित सही उत्तर बनाता है, भले ही प्रश्न में धारा 58(1)(b) का विशिष्ट संदर्भ दिया गया हो।


23. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत लिखित बयान दाखिल करने की समय-सीमा

उत्तर: (A) तीस दिन

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के आदेश VIII, नियम 1 के अनुसार, समन की तामील (service of summons) की तारीख से तीस दिनों के भीतर प्रतिवादी को अपना लिखित बयान (written statement) प्रस्तुत करना आवश्यक है।


24. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 14A(1) के तहत पंजीकृत पता

उत्तर: (A) मामले के अंतिम निर्धारण के छह वर्ष बाद

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 14A(1) के तहत दिया गया पंजीकृत पता, यदि परिवर्तित न किया जाए, तो मामले के अंतिम निर्धारण के छह वर्ष बाद तक वैध रहता है।


25. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 25(a) के तहत परिणाम

उत्तर: (D) अधिकरण कार्यवाही समाप्त कर देता है।

व्याख्या: माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 25(a) के अनुसार, यदि दावेदार पर्याप्त कारण के बिना अपना दावा विवरण (statement of claim) प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो अधिकरण (tribunal) कार्यवाही समाप्त कर देता है।


26. विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 10 के तहत समय सीमा

उत्तर: (D) तीन माह

व्याख्या: विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 10 के तहत, यदि कोई मामला केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाता है, तो उसके निर्णय के बाद विवाह संपन्न कराने की समय सीमा तीन महीने है।


27. घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 31 के तहत सजा

उत्तर: (B) एक वर्ष

व्याख्या: घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 31 के तहत संरक्षण आदेश के उल्लंघन के लिए अधिकतम सजा एक वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकती है।


28. भारतीय संविधान के तहत जनहित याचिका (PIL)

उत्तर: (B) अनुच्छेद 32

व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत, कोई नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए जनहित याचिका (PIL) सीधे सर्वोच्च न्यायालय में दायर कर सकता है।


29. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत न्यूनतम अवधि

उत्तर: (C) 15 दिनों से कम नहीं

व्याख्या: भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के अंतर्गत, नोटिस के प्रकाशन और कलेक्टर के समक्ष हितबद्ध व्यक्तियों की उपस्थिति के बीच न्यूनतम 15 दिनों की अवधि बीतनी चाहिए।


30. मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक मामले के लिए प्रावधान

उत्तर: (C) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 133

व्याख्या: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 133 सार्वजनिक उपद्रव (public nuisance) से संबंधित मामलों के लिए मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक मामला दायर करने का प्रावधान करती है।

यह एक वैचारिक बहुविकल्पीय होमवर्क समस्या है। नीचे दिए गए सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए हैं।


31. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AA(2)(i) के अनुसार आय की सीमा

उत्तर: (B) ₹50,000

व्याख्या: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AA(2)(i) के अनुसार, व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को खाताबही रखनी होगी यदि व्यवसाय या पेशे से आय ₹50,000 से अधिक है।


32. पेटेंट अधिनियम, 1970 के अंतर्गत पेटेंट आवेदन का प्रकाशन

उत्तर: (B) जब धारा 35 के अंतर्गत गोपनीयता निर्देश लागू किया गया हो।

व्याख्या: पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 35 के तहत, यदि किसी पेटेंट आवेदन पर गोपनीयता निर्देश (secrecy direction) लागू किया जाता है, तो आवेदन निर्धारित अवधि की समाप्ति के बाद भी प्रकाशित नहीं होता है।


33. दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत समाचार पत्र की जब्ती

उत्तर: (C) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।

व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि किसी समाचार पत्र में हित रखने वाला कोई भी व्यक्ति, जिसे जब्त घोषित कर दिया गया है, राजपत्र में प्रकाशन के दो महीने के भीतर उस घोषणा को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन कर सकता है। कारण (R) असत्य है, क्योंकि सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय की विशेष पीठ में न्यायाधीशों की संख्या उस उच्च न्यायालय के नियमों और संरचना पर निर्भर करती है, हमेशा ठीक तीन न्यायाधीश नहीं होते हैं।


34. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत स्वीकृतियाँ (Admissions)

उत्तर: (D) दोनों कथन सत्य हैं

व्याख्या: कथन 1 सत्य है क्योंकि स्वीकृतियाँ सामान्यतः उन्हें बनाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध प्रासंगिक होती हैं। कथन 2 भी सत्य है क्योंकि कुछ अपवादों में, मन या शरीर की दशा से संबंधित स्वीकृतियाँ, उन्हें बनाने वाले व्यक्ति की ओर से भी सिद्ध की जा सकती हैं यदि वे आचरण से समर्थित हों।


35. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 16(ii) के तहत कटौती

उत्तर: (B) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला मनोरंजन भत्ता

व्याख्या: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 16(ii) के अंतर्गत केवल सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाले मनोरंजन भत्ते (Entertainment Allowance) के लिए ही कटौती (deduction) योग्य है।


36. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत लिखत

उत्तर: (D) दोनों कथन सत्य हैं

व्याख्या: कथन 1 सत्य है, क्योंकि बिना प्रतिफल के परक्राम्य लिखत लेन-देन के पक्षों के बीच भुगतान का कोई दायित्व उत्पन्न नहीं करता है। कथन 2 भी सत्य है, क्योंकि यदि प्रतिफल आंशिक रूप से विफल हो जाता है, तो धारक केवल वास्तव में प्राप्त प्रतिफल के अनुरूप आनुपातिक राशि ही वसूल करने का हकदार होता है।


37. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत दायित्व

उत्तर: (A) केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है

व्याख्या: निष्कर्ष I अनुसरण करता है, क्योंकि कथन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कंपनी और उसके उत्तरदायी अधिकारियों दोनों को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। निष्कर्ष II अनुसरण नहीं करता है, क्योंकि कथन में यह भी कहा गया है कि कोई व्यक्ति उचित तत्परता साबित करके या यह साबित करके कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था, दायित्व से बच सकता है।


38. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 24(a) के तहत मानक कटौती

उत्तर: (C) 30

व्याख्या: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 24(a) के तहत, गृह संपत्ति से आय के वार्षिक मूल्य का 30% मानक कटौती के रूप में अनुमत है।


39. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत नुकसान की भरपाई

उत्तर: (D) अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण लाभ में वास्तविक कमी

व्याख्या: भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के अनुसार, अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण लाभ में वास्तविक कमी (bona fide diminution of profits) के प्रकार के नुकसान की भरपाई की जा सकती है।


40. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 35A के तहत अधिकतम राशि

उत्तर: (D) ₹3,000

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 35A के अनुसार, सामान्य मामलों में न्यायालय प्रतिकारात्मक खर्चे (compensatory costs) के रूप में अधिकतम ₹3,000 की राशि दिला सकता है।

यह एक वैचारिक बहुविकल्पीय होमवर्क समस्या है। नीचे दिए गए सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए हैं।


41. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुसार स्वीकृति का संप्रेषण

उत्तर: (B) जब इसे स्वीकृतिकर्ता के नियंत्रण से बाहर भेज दिया जाता है

व्याख्या: भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 4 के अनुसार, प्रस्तावक के विरुद्ध स्वीकृति का संप्रेषण तब पूर्ण होता है जब इसे स्वीकृतिकर्ता (acceptor) के नियंत्रण से बाहर भेजा जाता है, जिससे वह अब इसे रद्द नहीं कर सकता।


42. संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 के तहत आवश्यक नोटिस अवधि

उत्तर: (B) पंद्रह दिन का नोटिस

व्याख्या: संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 106 के अनुसार, यदि पट्टा (lease) कृषि या विनिर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए है और कोई विशेष अनुबंध नहीं है, तो पट्टा समाप्त करने के लिए पंद्रह दिन का नोटिस देना आवश्यक है।


43. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143 के तहत अधिकतम सजा

उत्तर: (C) एक वर्ष का कारावास

व्याख्या: परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143 के अंतर्गत, एक मजिस्ट्रेट संक्षिप्त विचारण (summary trial) में अधिकतम एक वर्ष के कारावास की सजा सुना सकता है।


44. कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निदेशक पहचान संख्या (DIN)

उत्तर: (C) निष्कर्ष I और II दोनों अनुसरण करते हैं

व्याख्या: कथन में कहा गया है कि DIN प्रस्तुत न करने पर दंड लगाया जा सकता है, जिससे निष्कर्ष I सही है। यह भी कहा गया है कि विफलता पर "पेनाल्टी" लगती है, जिसका अर्थ है कि कंपनी के दोषी अधिकारी भी उत्तरदायी होंगे, जिससे निष्कर्ष II भी सही है।


45. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र

उत्तर: (B) केवल कथन 1 सत्य है

व्याख्या: कथन 1 सत्य है, क्योंकि प्रमाणन प्राधिकारी अभिदाता के अनुरोध पर या जनहित में प्रमाणपत्र निलंबित कर सकता है। कथन 2 असत्य है, क्योंकि कानून आम तौर पर किसी भी कार्रवाई से पहले सुनवाई का अवसर (opportunity of being heard) प्रदान करता है, और अनिश्चित काल तक निलंबन का प्रावधान नहीं है।


46. बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986

उत्तर: (C) दोनों निष्कर्ष I और II अनुसरण करते हैं।

व्याख्या: कथन में कहा गया है कि अर्जित ब्याज भी बच्चे या किशोर को देय होता है, जिससे निष्कर्ष I सही है। यह भी कहा गया है कि सरकार "₹15,000 जमा करती है, जिसके लिए नियोक्ता से जुर्माने की राशि जमा की गई है", जिससे निष्कर्ष II सही है क्योंकि सरकार अतिरिक्त धनराशि जमा करने के लिए बाध्य नहीं है।


47. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत सामूहिक बलात्कार

उत्तर: (A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।

व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि भारतीय न्याय संहिता, 2023 सामूहिक बलात्कार के कुछ रूपों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान करती है। कारण (R) भी सत्य है और (A) की सही व्याख्या है, क्योंकि इस प्रावधान का उद्देश्य सभी यौन अपराधों को गैर-जमानती बनाना और कठोर सजा सुनिश्चित करना है।


48. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत संपत्ति की कुर्की

उत्तर: (A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।

व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि यदि घोषित व्यक्ति निर्दिष्ट समय के भीतर उपस्थित होता है, तो न्यायालय कुर्क की गई संपत्ति को मुक्त कर देगा। कारण (R) भी सत्य है और (A) की सही व्याख्या है, क्योंकि संपत्ति की कुर्की का उद्देश्य व्यक्ति को उपस्थित होने के लिए बाध्य करना है, न कि उसे स्थायी रूप से संपत्ति से वंचित करना।


49. माध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के तहत मध्यस्थता समझौता

उत्तर: (A) केवल कथन 1 सत्य है

व्याख्या: कथन 1 सत्य है, क्योंकि माध्यस्थता समझौता लिखित रूप में होना चाहिए। कथन 2 असत्य है, क्योंकि समझौते के लिए लिखित रिकॉर्ड आवश्यक है, केवल पक्षों के आचरण से ही समझौता निहित नहीं हो सकता है।


50. अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत विशेष समिति

उत्तर: (C) निष्कर्ष I और II दोनों अनुसरण करते हैं

व्याख्या: कथन में कहा गया है कि विशेष समिति को नई काउंसिल के गठन तक राज्य बार काउंसिल के सभी कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार है, जिसमें अनुशासनात्मक मामले भी शामिल हैं (निष्कर्ष I)। यह भी कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया अवधि बढ़ा सकती है (निष्कर्ष II)। इसलिए, दोनों निष्कर्ष सही हैं।

यह एक वैचारिक बहुविकल्पीय होमवर्क समस्या है। नीचे दिए गए सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए हैं।


51. आयकर अधिनियम, 1961 के तहत गृह संपत्ति से आय

उत्तर: (D) दोनों कथन सत्य हैं

व्याख्या: कथन 1 सत्य है क्योंकि गृह संपत्ति से आय की गणना करते समय वार्षिक मूल्य के 30% के बराबर मानक कटौती की अनुमति है। कथन 2 भी सत्य है क्योंकि उधार ली गई पूंजी पर ब्याज के लिए अधिकतम कटौती ₹2,00,000 तक सीमित है, कुछ शर्तों के अधीन।


52. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत सहदायिक (Coparcener)

उत्तर: (A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।

व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि 2005 के संशोधन के बाद, मिताक्षरा कानून द्वारा शासित संयुक्त हिंदू परिवार में पुत्री, पुत्र की भांति जन्म से ही सहदायिक बन जाती है। कारण (R) भी सत्य है और (A) की सही व्याख्या है, क्योंकि यह संशोधन पुत्रियों को पुत्रों के समान अधिकार, दायित्व और निर्योग्यताएँ प्रदान करता है।


53. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत प्रति-प्रस्ताव

उत्तर: (C) यह एक प्रति-प्रस्ताव का गठन करता है, जिससे मूल प्रस्ताव अस्वीकृत हो जाता है।

व्याख्या: भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुसार, स्वीकृति पूर्ण और बिना शर्त होनी चाहिए। यदि प्रस्ताव प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया में कोई नया नियम शामिल होता है, तो इसे मूल प्रस्ताव की अस्वीकृति और एक प्रति-प्रस्ताव (counter-proposal) माना जाता है।


54. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत बिना प्रतिफल के समझौता

उत्तर: (B) पति द्वारा स्वाभाविक प्रेम और स्नेह के कारण अपनी पत्नी को संपत्ति हस्तांतरित करने का लिखित और पंजीकृत वादा।

व्याख्या: भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 25 में कुछ अपवाद दिए गए हैं जहाँ बिना प्रतिफल के समझौता वैध होता है। स्वाभाविक प्रेम और स्नेह के कारण निकट संबंधियों के बीच किया गया लिखित और पंजीकृत समझौता इसका एक उदाहरण है।


55. प्रत्यायोजित विधान के संदर्भ में न्यायिक सिद्धांत

उत्तर: (B) अत्यधिक प्रत्यायोजन

व्याख्या: प्रत्यायोजित विधान (delegated legislation) के संदर्भ में, "अत्यधिक प्रत्यायोजन" (Excessive Delegation) का सिद्धांत विधायिका को प्रशासन पर "अनियंत्रित विधायी शक्ति" प्रदान करने से रोकता है।


56. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत वैधानिक बाधा

उत्तर: (B) धोखाधड़ी का पता चलने के बाद से याचिकाकर्ता प्रत्यर्थी के साथ पति-पत्नी के रूप में रह रहा है।

व्याख्या: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(2) के तहत, यदि धोखाधड़ी का पता चलने के बाद याचिकाकर्ता ने प्रत्यर्थी के साथ पति-पत्नी के रूप में रहना जारी रखा है, तो विवाह को अमान्य करने की डिक्री प्रदान करने में यह एक वैधानिक बाधा है।


57. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 21 के तहत प्रारंभ

उत्तर: (C) प्रत्यर्थी द्वारा मध्यस्थता हेतु अनुरोध प्राप्त होने की तिथि पर।

व्याख्या: माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 21 के अनुसार, मध्यस्थता कार्यवाही उस तारीख से प्रारंभ मानी जाती है जिस तारीख को प्रत्यर्थी को मध्यस्थता के लिए अनुरोध प्राप्त होता है।


58. सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य मामला

उत्तर: (A) सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, (1991) 1 एससीसी 598

व्याख्या: सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य के मामले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना कि प्रदूषण मुक्त जल और वायु का अधिकार जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) में शामिल है।


59. 'पूर्ण दायित्व' (Absolute Liability) का सिद्धांत

उत्तर: (A) एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ, एआईआर 1987 एससी 1086

व्याख्या: एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (ओलेयम गैस रिसाव मामला) के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने 'पूर्ण दायित्व' (Absolute Liability) का सिद्धांत प्रतिपादित किया था, जो रायलैंड्स बनाम फ्लेचर मामले के अपवादों के बिना सख्त दायित्व का एक कठोर रूप है।


60. 'नेमो जुडेक्स इन कॉसा सुआ' का सिद्धांत

उत्तर: (D) भारत संघ बनाम जी. गणयुथम, (1997) 7 एससीसी 463

व्याख्या: भारत संघ बनाम जी. गणयुथम के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि "नेमो जुडेक्स इन कॉसा सुआ" (कोई भी व्यक्ति अपने मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता) का नियम आवश्यकता के सिद्धांत (doctrine of necessity) के अधीन है।



61. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 11 के अनुसार रेस ज्युडिकेटा (Res Judicata)

उत्तर: (D) I, II, III और IV

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 (रेस ज्युडिकेटा) के अनुसार, किसी अनुवर्ती वाद पर यह सिद्धांत लागू होने के लिए, पूर्ववर्ती वाद अंतिम रूप से निर्णीत हो चुका होना चाहिए (I), बाद वाले वाद से पहले संस्थित किया गया होना चाहिए (II), सीधे और मूलतः उसी मामले से संबंधित होना चाहिए (III), और उन्हीं पक्षों या उनके प्रतिनिधियों के बीच होना चाहिए (IV)


62. डिक्री के निष्पादन के लिए कारावास का आदेश

उत्तर: (D) I, II, III और IV

व्याख्या: सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत, धन के भुगतान के लिए डिक्री के निष्पादन हेतु कारावास का आदेश देने से पहले, न्यायालय को संतुष्ट होना चाहिए कि निर्णीत-ऋणी के फरार होने की संभावना है (I), उसने बेईमानी से संपत्ति हस्तांतरित की है (II), डिक्री न्यासीय हैसियत से हिसाब देने के लिए थी (III), या उसके पास भुगतान करने के साधन थे/हैं और उसने उपेक्षा की है (IV)


63. एकपक्षीय डिक्री को अपास्त करना

उत्तर: (A) I और II

व्याख्या: एकपक्षीय डिक्री (ex parte decree) को अपास्त किया जा सकता है यदि प्रतिवादी न्यायालय को संतुष्ट करता है कि समन की विधिवत तामील नहीं की गई थी (I), या उसे सुनवाई के समय उपस्थित होने से किसी पर्याप्त कारण से रोका गया था (II)। समन की अनियमितता पर्याप्त नहीं है यदि उसे सुनवाई की सूचना थी (III), और विरोधी पक्ष को सूचना दिए बिना डिक्री अपास्त नहीं की जा सकती (IV)


64. पुलिस हिरासत में संस्वीकृति बयान

उत्तर: (B) केवल तभी जब यह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में दिया गया हो

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA 2023) के तहत (जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 25 और 26 का स्थान लेता है), पुलिस हिरासत में दिया गया कोई भी संस्वीकृति बयान साक्ष्य में स्वीकार्य नहीं होता है, सिवाय तब जब यह मजिस्ट्रेट की तत्काल और प्रत्यक्ष उपस्थिति में किया गया हो।


65. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत विशेषज्ञों की राय

उत्तर: (C) धारा 36

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 36 (जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 45 का स्थान लेती है) विशेषज्ञों की राय से संबंधित है।


66. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अनुसार गलत कथन

उत्तर: (B) A, 1 मार्च, 2023 को B को एक हज़ार रुपये देने के लिए लिखित रूप से पूर्णतः सहमत होता है। यह तथ्य कि उसी समय, एक मौखिक समझौता किया गया था कि 31 मार्च, 2023 तक धनराशि का भुगतान नहीं किया जाएगा, सिद्ध किया जा सकता है।

व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (जो धारा 92 का स्थान लेता है) के अनुसार, जब किसी संविदा, अनुदान या संपत्ति के अन्य प्रबंध के निबंधनों को दस्तावेजी रूप में लाया जाता है, तो ऐसे दस्तावेज़ के निबंधनों को बदलने या खंडन करने के उद्देश्य से मौखिक साक्ष्य की अनुमति नहीं है। लिखित अनुबंध में भुगतान की तारीख को मौखिक समझौते से नहीं बदला जा सकता।


67. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत प्रतिषिद्ध नातेदारी

उत्तर: (D) I, II, III और IV

व्याख्या: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 2(b) और अनुसूची "प्रतिषिद्ध नातेदारी की डिग्रियाँ" को परिभाषित करती है जिसमें दिए गए सभी चार बिंदु शामिल हैं।


68. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के लिए मौलिक कर्तव्य

उत्तर: (C) अनुच्छेद 51A(g)

व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51A(g) भारत के प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दयाभाव रखे।


69. मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 के तहत आधार

उत्तर: (C) I, II, III और IV

व्याख्या: मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 की धारा 2 के अंतर्गत, दिए गए सभी चार आधार (पति का ठौर-ठिकाना ज्ञात न होना, पाँच वर्ष की सजा, दो वर्ष तक वैवाहिक कर्तव्यों का पालन न करना, एक वर्ष तक भरण-पोषण की उपेक्षा) पत्नी द्वारा विवाह विघटन की डिक्री प्राप्त करने के लिए वैध आधार हैं।


70. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत "मध्यवर्ती"

उत्तर: (D) I, II, III और IV

व्याख्या: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुसार "मध्यवर्ती" (intermediary) की परिभाषा बहुत व्यापक है और इसमें दूरसंचार सेवा प्रदाता, सर्च इंजन, साइबर कैफे, ऑनलाइन-नीलामी साइटें और ऐसे सभी व्यक्ति शामिल हैं जो इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के संबंध में सेवा प्रदान करते हैं।



71. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के अंतर्गत अपील योग्य आदेश

उत्तर: (D) धारा 17 के अंतर्गत अंतरिम उपाय को मंजूर करने से इंकार करना।

व्याख्या: माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत, धारा 8, 9 और 11 के तहत कुछ आदेशों के खिलाफ अपील की जा सकती है, लेकिन धारा 17 के तहत अंतरिम उपाय मंजूर करने या इंकार करने का आदेश आमतौर पर अपील योग्य नहीं होता है।


72. अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 9A के तहत विधिक सहायता समिति

उत्तर: (C) नौ से अधिक नहीं परंतु पाँच से कम नहीं।

व्याख्या: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 9A के अंतर्गत, बार काउंसिल द्वारा गठित विधिक सहायता समिति (legal aid committee) में नौ से अधिक नहीं और पाँच से कम नहीं सदस्य होंगे।


73. अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत भारतीय बार काउंसिल की अनुशासनात्मक शक्तियां

उत्तर: (D) धारा 38

व्याख्या: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 38 भारतीय बार काउंसिल (BCI) की अपीलीय अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रावधान करती है, जहाँ वह राज्य बार काउंसिल के आदेशों के खिलाफ अपील सुन सकती है।


74. अपकृत्य (Tort) में सामान्य बचाव और प्रमुख मामले

उत्तर: (C) i-3; ii-4; iii-1; iv-2

व्याख्या: सही मिलान हैं:

i. ईश्वरीय कृत्य (Act of God) - निकोल्स बनाम मार्सलैंड (Nichols v. Marsland)

ii. सहमति (Consent/Volenti non fit injuria) - हॉल बनाम ब्रुकलैंड्स ऑटो-रेसिंग क्लब (Hall v. Brooklands Auto Racing Club)

iii. वैधानिक प्राधिकरण (Statutory Authority) - वॉन बनाम टैफ वेल रेल कंपनी (Vaughan v Taff Vale Rail Co.)

iv. आवश्यकता (Necessity) - कर्क बनाम ग्रेगरी (Kirk v Gregory)


75. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद

उत्तर: (A) एक अध्यक्ष और दस अन्य सदस्य, या एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य जो विहित किए जा सकते हैं।

व्याख्या: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 3(2) के अंतर्गत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद में एक अध्यक्ष और दस अन्य सदस्य, या एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य जो निर्धारित किए जा सकते हैं, शामिल होंगे।


76. प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है

उत्तर: (C) बेरुबारी यूनियन एंड एक्सचेंज ऑफ एन्क्लेव्स के संबंध में, AIR 1960 SC 845

व्याख्या: बेरुबारी यूनियन मामले (1960) में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना था कि प्रस्तावना (Preamble) संविधान का हिस्सा नहीं है। बाद में, केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले (1973) में इस फैसले को पलट दिया गया और माना गया कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है।


77. संधियों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करने के लिए अनुच्छेद

उत्तर: (C) अनुच्छेद 253

व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253 संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ की गई किसी संधि, करार या अभिसमय अथवा किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगम या अन्य निकाय में किए गए किसी विनिश्चय को कार्यान्वित करने के लिए कोई भी विधि बनाने की शक्ति देता है।


78. 'निजता के अधिकार' से संबंधित निर्णय

उत्तर: (D) I, II, III और IV

व्याख्या: दिए गए सभी मामले - खड़क सिंह, पीयूसीएल, न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टस्वामी और एमपी शर्मा - निजता के अधिकार (right to privacy) के मुद्दे से संबंधित थे, जिसमें पुट्टस्वामी मामले ने इसे एक मौलिक अधिकार के रूप में अंतिम रूप से स्थापित किया।


79. क्षेत्र सौंपने के लिए आवश्यक कार्रवाई

उत्तर: (D) संसद द्वारा विधायी अधिनियमन, और फिर भारत संघ की कार्यकारी कार्रवाई

व्याख्या: भारत संघ द्वारा किसी अन्य देश को कोई क्षेत्र सौंपने के लिए, पहले संसद द्वारा संविधान में संशोधन के माध्यम से विधायी अधिनियमन (legislative enactment) आवश्यक है, और फिर सरकार की कार्यकारी कार्रवाई द्वारा इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है (बेरुबारी मामले में SC के फैसले के बाद 9वें संशोधन द्वारा स्थापित सिद्धांत)।


80. अनुच्छेद 143 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की सलाह

उत्तर: (A) नहीं, क्योंकि इसे निर्णय नहीं माना जाता है

व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सलाह (advisory opinion) न्यायिक निर्णय (judgment) नहीं मानी जाती है और इसलिए यह न्यायिक दृष्टांत (judicial precedent) का दर्जा नहीं रखती है।


81. मानहानि के आपराधिक मुकदमे में उच्च न्यायालय की शक्ति

उत्तर: (C) अंतर्निहित शक्ति

व्याख्या: मानहानि के आपराधिक मुकदमे में समाचार पत्रों के प्रकाशन पर रोक लगाने का आदेश पारित करते समय उच्च न्यायालय ने अपनी अंतर्निहित शक्ति (inherent power) का प्रयोग किया है।


82. सूचना के अधिकार का स्रोत

उत्तर: (C) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a)

व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना है कि 'सूचना का अधिकार' (Right to Information) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न अंग है।


83. भारतीय संविधान की अनुसूची 'कुछ अधिनियमों और विनियमों के विधिमान्यकरण' के विषय में

उत्तर: (A) अनुसूची IX

व्याख्या: भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची (Schedule IX) कुछ अधिनियमों और विनियमों के विधिमान्यकरण (Validation of certain Acts & Regulations) के विषय से संबंधित है।


84. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के संबंध में कथन

उत्तर: (D) सभी कथन सत्य हैं

व्याख्या: अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। यह लोकस स्टैन्डाय (locus standi) के बारे में मौन है, उस विरोधी पक्ष के बारे में मौन है जिसके विरुद्ध राहत दी जा सकती है, और अपने दायरे में छठे प्रकार की रिट (जैसे क्यू वारंटो, आदि) के लिए स्थान प्रदान करता है, जिससे सभी कथन सत्य हैं।


85. निचली न्यायपालिका में अवमानना क्षेत्राधिकार

उत्तर: (D) संबंधित उच्च न्यायालय उस अवमानना के मामले पर विचार कर सकते हैं जिसके क्षेत्राधिकार में निचली अदालत आती है।

व्याख्या: जबकि सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 129) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 215) अभिलेख न्यायालय हैं और उनके पास अवमानना का क्षेत्राधिकार है, निचली न्यायपालिका सीधे तौर पर अवमानना के लिए दंडित नहीं कर सकती है। संबंधित उच्च न्यायालय उस अवमानना के मामले पर विचार कर सकता है।


86. आर. के. आनंद बनाम रजिस्ट्रार, दिल्ली उच्च न्यायालय मामला

उत्तर: (C) एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करके आपराधिक मुकदमे में हस्तक्षेप करने के लिए।

व्याख्या: इस मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने आर. के. आनंद को एक आपराधिक मुकदमे में गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करके और अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप करके कदाचार का दोषी ठहराया था।


87. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत मिलान (प्रश्न संख्या 87 पृष्ठ 39 पर है)

उत्तर: (C) i-4; ii-3; iii-1; iv-2

व्याख्या: यह प्रश्न संख्या 1 के समान है और सही मिलान हैं: i-धारा 16; ii-धारा 17; iii-धारा 10; iv-धारा 12


88. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत सह-जमानती

उत्तर: (C) सह-जमानती अदा न किए हुए भाग को समान अंश में बाँटते हैं

व्याख्या: भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुसार, यदि मूल ऋणी (principal debtor) ऋण का कुछ भाग अदा न किया हुआ छोड़ दे और दो या अधिक सह-जमानती (co-sureties) हों, तो वे अदा न किए हुए भाग को समान अंश में योगदान (contribution) करते हैं।


89. विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 के तहत चल संपत्ति

उत्तर: (A) जब संपत्ति वादी के एजेंट या ट्रस्टी के रूप में रखी जाती है

व्याख्या: विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 के अंतर्गत, चल संपत्ति पर कब्जा रखने वाले प्रतिवादी को उसे वादी को सौंपने के लिए तब बाध्य किया जा सकता है जब संपत्ति वादी के एजेंट या ट्रस्टी (trustee) के रूप में रखी जाती है।


90. प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत कथन

उत्तर: (B) केवल कथन 1 सत्य है

व्याख्या: कथन 1 सत्य है क्योंकि एक संयुक्त प्रशासनिक अधिकरण वही अधिकार क्षेत्र और शक्तियाँ रखता है जो राज्यों के लिए एक प्रशासनिक अधिकरण रखता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि अधिकरणों को अवमानना के उद्देश्य से उच्च न्यायालय के समान शक्तियां नहीं हैं, अवमानना अधिनियम, 1971 में "उच्च न्यायालय" के संदर्भों में ऐसे अधिकरणों को शामिल नहीं किया गया है।